सही शिक्षा क्या है :-
मित्रो आज मैं शिक्षा पर अपना लेख लिखने जा रहा हु उमीद है पहले के सभी लेख आपको पसंद आये हुए होंगे । क्या आज हमारी शिक्षा सही है ? वर्तमान में ये प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है । क्या हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था परिवर्तन करने की आवश्यकता है। जीवन मे शिक्षा का महत्व, शिक्षा का अर्थ , शिक्षा की आवश्यकता, इनसब बिन्दुयो पर विचार करेंगे ।। चलो शुरू करते है ।।
शिक्षा का अर्थ:-
शिक्षा शब्द संस्कृत के शिक्ष् धातु से बना है जिसका अर्थ है सीखना या सिखाना। यानि इस अर्थ में शिक्षा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया है। शिक्षा के लिए विद्या शब्द का भी उपयोग किया जाता है जिसका अर्थ होता है जानना। एजुकेशन शब्द लैटिन भाषा के चार शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है प्रशिक्षित करना, अन्दर से बाहर निकालना, पालन पोषण करना और आंतरिक से वाह्य की तरफ जाना। अतः संक्षेप में कहा जा सकता है कि शिक्षा का अर्थ मनुष्य की आंतरिक शक्तियों को बाहर की तरफ आने के लिए प्रेरित करना।
जॉन एडम्स के मुताबिक प्राचीन काल में शिक्षा शिक्षक केंद्रित थी। जिसके दो छोर थे, शिक्षक और शिक्षार्थी। बाद में जॉन डिवी ने शिक्षा को बालकेंद्रित बताते हुए इसके तीन केंद्रों का जिक्र किया। जो क्रमशः शिक्षक, शिक्षार्थी और पाठ्यक्रम हैं। शिक्षा की विभिन्न परिभाषाएं गीता से अनुसार, “सा विद्या विमुक्ते”। यानि विद्या वही है जो बंधनों से मुक्त करे। टैगोर के अनुसार, “हमारी शिक्षा स्वार्थ पर आधारित, परीक्षा पास करने के संकीर्ण मक़सद से प्रेरित, यथाशीघ्र नौकरी पाने का जरिया बनकर रह गई है।
महात्मा गांधी के अनुसार, ” सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चों के आध्यात्मिक, बौद्धिक और शारीरिक पहलुओं को उभारती है और प्रेरित करती है। इस तरीके से हम सार के रूप में कह सकते हैं कि उनके मुताबिक़ शिक्षा का अर्थ सर्वांगीण विकासथा।”
शिक्षा की आवश्यकता:-
हमारे विचारों का निर्माण हमारे जीवन, हमारे आचरण के अनुरूप ही होता है। हमारे जीवन तथा आचरण का मूल आधार है हमारी शिक्षा। शिक्षा हमारे जीवन का हिस्सा है और जीवन में सफलता के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही साथ शिक्षा राष्ट्र के व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के माध्यम से उन दिमागों को शक्ति मिलती है जो अच्छे विचारों को समझने में सक्षम होते है। स्त्री हो या पुरुष, दोनों के लिए ही शिक्षा समान रुप से आवश्यक होती है, क्योंकि दोनों ही मिलकर स्वस्थ्य और शिक्षित समाज का निर्माण करते हैं। केवल एक शिक्षित व्यक्ति ही राष्ट्र का निर्माण करके, इसे सफलता और प्रगति के रास्ते की ओर ले जा सकता है। शिक्षा का मतलब केवल एक डिग्री पाना ही नहीं होता है बल्कि शिक्षा आपको अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाती है। शिक्षा एक मात्र साधन है जो भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और पर्यावरण सम्बंधित विराट समस्याओं को दूर कर सकती है। इस बात पर नेल्सन मंडेला जी की एक बात याद आती है, उन्होंने कहा था कि: “शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।”
शिक्षा का महत्व :-
आज इन्शान अपना भला बुरा जानने ओर अपने विचारों को गति देने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण स्थान रखी है । 21वी सदी में शिक्षा का महत्व और बढ़ जाता है आज हर समाज में शिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दौड़ रहे है
शिक्षा ही है जिसने वर्तमान का इन्शान दिया है । हर परिस्थितियों में अपने आपको सम्बल करने और हर समस्या का सामना करने की शक्ति कहि न कही शिक्षा से ही मिली है ।। प्राचीन काल से होने वाली हर परिवर्तन की क्रंति के पीछे भी ये शिक्षा ही है ।।
जय हिंद ।।
मित्रो आज मैं शिक्षा पर अपना लेख लिखने जा रहा हु उमीद है पहले के सभी लेख आपको पसंद आये हुए होंगे । क्या आज हमारी शिक्षा सही है ? वर्तमान में ये प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है । क्या हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था परिवर्तन करने की आवश्यकता है। जीवन मे शिक्षा का महत्व, शिक्षा का अर्थ , शिक्षा की आवश्यकता, इनसब बिन्दुयो पर विचार करेंगे ।। चलो शुरू करते है ।।
शिक्षा का अर्थ:-
शिक्षा शब्द संस्कृत के शिक्ष् धातु से बना है जिसका अर्थ है सीखना या सिखाना। यानि इस अर्थ में शिक्षा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया है। शिक्षा के लिए विद्या शब्द का भी उपयोग किया जाता है जिसका अर्थ होता है जानना। एजुकेशन शब्द लैटिन भाषा के चार शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है प्रशिक्षित करना, अन्दर से बाहर निकालना, पालन पोषण करना और आंतरिक से वाह्य की तरफ जाना। अतः संक्षेप में कहा जा सकता है कि शिक्षा का अर्थ मनुष्य की आंतरिक शक्तियों को बाहर की तरफ आने के लिए प्रेरित करना।
जॉन एडम्स के मुताबिक प्राचीन काल में शिक्षा शिक्षक केंद्रित थी। जिसके दो छोर थे, शिक्षक और शिक्षार्थी। बाद में जॉन डिवी ने शिक्षा को बालकेंद्रित बताते हुए इसके तीन केंद्रों का जिक्र किया। जो क्रमशः शिक्षक, शिक्षार्थी और पाठ्यक्रम हैं। शिक्षा की विभिन्न परिभाषाएं गीता से अनुसार, “सा विद्या विमुक्ते”। यानि विद्या वही है जो बंधनों से मुक्त करे। टैगोर के अनुसार, “हमारी शिक्षा स्वार्थ पर आधारित, परीक्षा पास करने के संकीर्ण मक़सद से प्रेरित, यथाशीघ्र नौकरी पाने का जरिया बनकर रह गई है।
महात्मा गांधी के अनुसार, ” सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चों के आध्यात्मिक, बौद्धिक और शारीरिक पहलुओं को उभारती है और प्रेरित करती है। इस तरीके से हम सार के रूप में कह सकते हैं कि उनके मुताबिक़ शिक्षा का अर्थ सर्वांगीण विकासथा।”
शिक्षा की आवश्यकता:-
हमारे विचारों का निर्माण हमारे जीवन, हमारे आचरण के अनुरूप ही होता है। हमारे जीवन तथा आचरण का मूल आधार है हमारी शिक्षा। शिक्षा हमारे जीवन का हिस्सा है और जीवन में सफलता के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही साथ शिक्षा राष्ट्र के व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के माध्यम से उन दिमागों को शक्ति मिलती है जो अच्छे विचारों को समझने में सक्षम होते है। स्त्री हो या पुरुष, दोनों के लिए ही शिक्षा समान रुप से आवश्यक होती है, क्योंकि दोनों ही मिलकर स्वस्थ्य और शिक्षित समाज का निर्माण करते हैं। केवल एक शिक्षित व्यक्ति ही राष्ट्र का निर्माण करके, इसे सफलता और प्रगति के रास्ते की ओर ले जा सकता है। शिक्षा का मतलब केवल एक डिग्री पाना ही नहीं होता है बल्कि शिक्षा आपको अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाती है। शिक्षा एक मात्र साधन है जो भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और पर्यावरण सम्बंधित विराट समस्याओं को दूर कर सकती है। इस बात पर नेल्सन मंडेला जी की एक बात याद आती है, उन्होंने कहा था कि: “शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।”
शिक्षा का महत्व :-
आज इन्शान अपना भला बुरा जानने ओर अपने विचारों को गति देने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण स्थान रखी है । 21वी सदी में शिक्षा का महत्व और बढ़ जाता है आज हर समाज में शिक्षा का प्रसार बढ़ रहा है और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दौड़ रहे है
शिक्षा ही है जिसने वर्तमान का इन्शान दिया है । हर परिस्थितियों में अपने आपको सम्बल करने और हर समस्या का सामना करने की शक्ति कहि न कही शिक्षा से ही मिली है ।। प्राचीन काल से होने वाली हर परिवर्तन की क्रंति के पीछे भी ये शिक्षा ही है ।।
जय हिंद ।।

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