सत्य परमात्मा कौन है :-

आज की अध्यत्मिकज्ञान यात्रा में हम जानने की कोशिश करेंगे कि सत्य परमात्मा कौन है ? 
परमात्मा की खोज प्राचीन काल से ही चली आ रही है । और इस खोज में  युग बीत गए कुछ को सफलता प्राप्त हुई ओर कुछ आज भी इस यात्रा पर निरन्तर आगे बढ़ रहे है । यात्रा सुरु करे उसके पहले हम परमात्मा का अर्थ अच्छे से समझ ले । 
परमात्मा का अर्थ :- 
 परमात्मा दो शब्दों से मिलकर बना है परम+  आत्मा  , परम का अर्थ है सबसे श्रेष्ठ ओर आत्मा का अर्थ है आत्म तत्व ।
सत्य परमात्मा कौन है  :- 
इंसान के सामने हमेशा एक सवाल रहा है: ' क्या परमात्मा है ? यदि है तो वह कौन है ? या क्या है ? उसके साथ सम्पर्क कहाँ और कैसे किया जा सकता है ? क्या उस परमात्मा ने अपने बारे में इन्शान को कभी कुछ बताया है ?' हालाँकि ऐसे सवालों का ज़बाब देने के लिए अनेको ग्रन्थ लिखे जा चुके हैं. लेकिन केवल एक जबाब के अलावा इसका कोई ज़बाब नहीं हो सकता । इसका सही जबाब सिर्फ तत्व दर्शी संत या सतगुरु ही दे सकते हैं । बाकी सब जबाब केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं । तत्वदर्शी संत  का परिचय गीता जी में भी है कृष्ण जी गीता ज्ञान देते समय अर्जुन को बताते हैं अर्जुन तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं यह तुम नहीं जानते मैं जानता हूं अगर तुम्हें इस जन्म मरण से पिछा छुड़वाना है तो तत्वदर्शी संत की खोज करो उनकी शरण ग्रहण करो तभी संभव है जो परमात्मा के शरण में जाने का मार्ग बता सकता है। जहाँ जाने के बाद जन्म मरण से छुटकारा मिल सकता है वही सत्य परमात्मा है । वही सर्वेश्वर है 
परमात्मा से कैसे मिले :- 
अब हम परमात्मा से मिलना चाहते हैं लेकिन मिलें तो मिले कैसे ? परमात्मा के बारे में बहुत कुछ सुनते हैं, जैसे कि वह एक शहंशाह, जिस से मिलने के लिए हमें कोई माध्यम चाहिये जैसे कि कोई सतगुरु, मार्गदर्शक या धर्म प्रचारक जो उस अन्तर के रास्ते की वाकफियत रखता हो । परमात्मा से मिलाप के बारे में मनुष्य ने कितनी धारणाएँ बना रखी हैं । दर्शनशास्त्र की सभी धारणाओं के विद्धान इससे सहमत हैं कि जीव के अस्तित्व का मुख्य उद्देश्य परमात्मा से मिलाप है । पर मिलाप किया जाये तो कैसे ? इस विषय पर उनकों कोई सही जानकारी नहीं है । इसलिए वह पढ़ते-पढ़ाते हैं, चर्चा-गोष्ठी करते हैं और फिर बहुत से लोगों को उपदेश देने लगते हैं । पर यह परमात्मा का ही बनाया हुआ क़ानून है कि बिना सतगुरु के द्वारा बताये गए साधन यानी संतों के मार्ग के सिवा न तो इस धरती पर कभी किसी का परमात्मा से मिलाप हुआ है और न ही साक्षात्कार । किसी अन्य साधन से यह मिलाप संभव ही नहीं है ।
प्राचीन वैदिक युग के महान ऋषियों ने कहा है : ' तीन वस्तुएँ संसार में बहुमल्य और दुर्लभ हैं जो किसी इनसान को सौभाग्यवश परमात्मा की कृपा से प्राप्त होती हैं । वह हैं : मनुष्य जन्म, मुक्ति की लालसा और पूर्ण सतगुरु की शरण । निश्चित रूप से आज आपको इस यात्रा में आनंद मिला होगा और पूर्ण परमात्मा  की जानकारी मिली आज बस इतना ही  आगे भी आपको इस प्रकार की आध्यात्मिक  यात्रा  करवाते रहेंगे ।।

Comments

  1. क्या आप जानते है ? #GodKabir_Comes_In_4_Yugas
    कबीर परमेश्वर पूर्ण परमात्मा है वह चारों युगों में अलग-अलग रूप धर पृथ्वी पर एक संत के रूप में प्रकट होते हैं। SadhanaTV 7.30pm

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  2. क्या आप जानते है ? #GodKabir_Comes_In_4_Yugas
    कबीर परमेश्वर पूर्ण परमात्मा है वह चारों युगों में अलग-अलग रूप धर पृथ्वी पर एक संत के रूप में प्रकट होते हैं। SadhanaTV 7.30pm

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